अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समिति का धरना

दरभंगा,संवाददाता। मिथिला क्षेत्र अंग्रेजों के जमाने से ही उपेक्षित रहा है। यहां विकास की गति को तेज करने के लिए पृथक राज्य की मांग करना कोई गुनाह नहीं बल्कि मिथिला वासियों का अधिकार है। उक्त बातें बुधवार को अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समिति के आह्वान पर धरनार्थियों को सांसद कीर्ति झा आजाद ने संबोधित करते हुए कहीं।

बैद्यनाथ चौधरी के नेतृत्व में अलग मिथिला राज्य की मांग को लेकर मिथिला संघर्ष समिति के आह्वान पर आयुक्त कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन किया गया। धरनार्थियों को संबोधित करते हुए श्री आजाद ने कहा कि अलग राज्य की मांग दशकों पुरानी है। केंद्र में सरकार आती जाती रहती है लेकिन मांगों पर कोई भी ध्यान नहीं दे रहा यह उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि अलग राज्य के गठन नहीं होने के कारण यहां की अवाम को बाढ़ एवं सुखाड़ में सही मुआवजा नहीं मिल पाता है। मिथिला राज्य स्थापना का प्रश्न कोई नया नहीं है। यह संप्रभुता संपन्न एक अलग राज्य था। इसका अपना इतिहास एवं भूगोल भी है। मिथिला की अपनी राजनीतिक एवं सांस्कृतिक विरासत भी रही है। इसको ज्यादा दिनों तक नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बैजनाथ चौधरी ने कहा कि राष्ट्रपति इस पर शीघ्र ही निर्णय लें अन्यथा हम लोगों को उग्र आंदोलन चलाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। कार्यक्रम का समापन आयुक्त को राष्ट्रपति के नाम पृथक मिथिला राज्य के गठन के लिए स्मार्ट पत्र सौप कर किया गया । इससे पहले सीताराम चौधरी, उदय शंकर मिश्र, राम नारायण झा , उदय शंकर चौधरी, दीपक झा , पारसनाथ चौधरी, प्रो. चंदेश्वर झा , प्रो. गुना नंद झा , मो. साजिद हुसैन, रतिकांत झा , डॉ परमानंद झा , कमला कांत झा , मुखिया उज्जवल कुमार, विनोदानंद झा , कृष्णकांत चौधरी, रमन जी, सुनीति रंजन दास, प्रो. राम सुभग चौधरी, सोमेश्वर नाथ झा, चंद्रमोहन चौधरी, विजय कुमार पासवान, आदि ने भी धरनार्थियों को संबोधित किया।

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