स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से ही केन्द्र व राज्य सरकार मिथिला की चिन्ता नहीं कर रही है- डॉ. बैद्यनाथ चौधरी ‘बैजू’

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से हीं मिथिला उपेक्षा का दंश झेल रही है।ये क्रम अभी भी अनवरत चलती आ रही है। केन्द्र और राज्य सरकार मिथिला और मिथिलावासी की चिन्ता नहीं कर रही है। इसी का परिणाम है कि मिथिला और मिथिलावासी दरिद्रता के गड्ढे में गिरती जा रही है। अपनी सांस्कृतिक संपन्नता के लिए संसार भर में ख्यात मिथिला आर्थिक दृष्टि से दिन प्रतिदिन निर्धनता की ओर कदम बढ़ाने को विवश है।कभी यहां पर गांव गांव में शिक्षा का केंद्र था परंतु आज शिक्षा के लिए मिथिला के छात्र पलायन कर रहे हैं।

बाढ़ की विभीषिका से हमारे पूर्वज त्रस्त रहे हैं, हम लोग भी आज इस से तबाह हो रहे हैं और हमारे संतान भी इससे बहुत ज्यादा त्रस्त है। बाढ़ के निदान का भरोसा दे मिथिलावासी को सब दिन से ठगा जा रहा है अभी भी यही हो रहा है । जब बाढ़ नहीं आती तब सुखाड़ का प्रभाव होता है, अपितु सूखा और बाढ़ से त्रस्त मिथिला की आंसू पोंछने वाला कोई नहीं है। खेती चौपट हो गई है जिससे मिथिला के कृषि मजदूर पलायन को विवश है । रोजगार के अभाव चीनी मील, पेपर मील, जूट मिल आदि आदि मिल आदि आदि, जूट मिल आदि यहां कब्रगाह मात्र है।

मिथिला की प्रतिभा रोजी रोटी के लिए अन्य अन्य प्रदेश में मजदूरी कर रहे हैं। बिजली के लिए अभी भी बहुत सारे गांव टोल तरस रहे हैं। भाषा साहित्य का विकास संरक्षण अभाव में प्रभावित है। मैथिली के प्रति सरकारी स्तर पर षड्यंत्र चल रहा है। ऐतिहासिक पुरातात्विक और धार्मिक स्थल पर्यटन केंद्र की अहर्ता रखते हुए भी इस मान्यता एवं पर्यटन की दृष्टि से अपेक्षित विकास के लिए लालायित हैं। सरकार की नजर में जैसे मिथिला क्षेत्र उसका अंग नहीं हो । केंद्र और राज्य सरकार गठन में हम लोगों का बहुत बड़ा अवदान रहता है, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से हमें पूर्णतः किनारे कर दिया गया है। अष्टम अनुसूची में सम्मिलित बिहार की एक मात्र भाषा मैथिली की प्रगति में बाधा उत्पन्न किया जा रहा है।

मैथिली को प्राथमिक शिक्षा का माध्यम बनाने का न्यायादेश पर्यंत चिंता नहीं किया जा रहा है । मैथिली के शिक्षक की बहाली नहीं की जा रही है। अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समिति इन्हीं सब समस्या के एकमात्र निदान को लेकर मिथिला राज्य पुनर्गठन की मांग कर रही है । मिथिला अनादि काल से अपना स्वतंत्र परिचय रखती है। अतीत में मिथिला का अपना स्वाधीन सत्ता था। वर्तमान समय में मिथिला के समग्र विकास के लिए पृथक मिथिला राज्य आवश्यक ही नहीं अपितु अनिवार्य है। समिति इसके लिए संघर्षशील है ।

मिथिला का सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक, साहित्यिक भाषा आदि क्षेत्र में समग्र विकास के लिए मिथिला से लेकर संसद तक समिति आंदोलन करती आ रही है और पृथक मिथिला राज्य के गठन तक यह अभियान अनवरत चलती रहेगी । इसी क्रम में 15 दिसंबर 18 को संसद के समक्ष विशाल धरना प्रदर्शन निर्धारित है। इसमें मिथिला के विभिन्न जिला संग प्रवासी मैथिल भी भाग लेंगे।

समिति सभी मिथिलावास, मिथिला मैथिली सेवी संस्था, मिथिला के सभी दल के राजनेता, सामाजिक संगठन आदि को आह्वान करती है जो प्रस्तावित धरना प्रदर्शन में सहभागी बन अपने राज्य को स्थापित करने के लिए जुटें। राज्य सरकार से दरभंगा में उच्च न्यायालय खंडपीठ की स्थापना करने के लिए निरंतर आग्रह किया जा रहा है, जिसको उपेक्षित किया जा रहा है। समिति केंद्र और राज्य सरकार से आग्रह करती है जो मिथिला वासी के धैर्य की परीक्षा लेना छोड़ अविलंब निम्नलिखित मांग पूरा करें पूरा करें :-

1. मैथिली को अविलंब राज्य की द्वितीय राजभाषा घोषित किया जाय।

 

1. मैथिली को अविलंब राज्य की द्वितीय राजभाषा घोषित किया जाय।

1मिथिला समग्र विकास के लिए अविलंब पृथक मिथिला राज्य का गठन हो।

2. केंद्र और राज्य सरकार सभी कार्यालय में मैथिली अनुवादक बहाल किया जाए ।

3.मैथिली में प्राथमिक शिक्षा अनिवार्य किया जाए।

4.मिथिला के सभी रेलवे स्टेशन पर मिथिलाक्षर में बोर्ड लगाया जाए और मैथिली में उद्घोषणा की व्यवस्था की जाए ।

5. दरभंगा में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना किया जाए। 6.बाढ़ और सुखाड़ का स्थाई निदान हो।

7. बंद पड़े चीनी मिल, जूट मिल ,पेपर मिल आदि को चालू करने संघ को चालू करने संघ नए उद्योगों की स्थापना कर रोजगार का अवसर बढ़ाया जाए।

8. मिथिला को शिक्षा का केंद्र बना छात्र के पलायन को रोका जाए ।

9.आकाशवाणी दरभंगा से समस्त प्रसारण मैथिली में हो ।

10.मिथिला क्षेत्र में दूरदर्शन प्रसारण के लिए केंद्र की स्थापना किया जाए ।

11.आकाशवाणी दरभंगा में समाचार एकांश स्थापित कर प्रादेशिक समाचार संग मैथिली में समाचार का प्रसारण सुनिश्चित किया जाए ।

उपयुक्त मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में समिति अपने आंदोलन को उग्र बनाएगी । समिति अपना परम लक्ष्य मिथिला राज्य गठन और मिथिला के सर्वांगीण विकास के लिए संकल्पित है।जिसको लेकर जनजागरण कल आनंदपुर सहोड़ा से शुरू किया जायेगा इस सन्दर्भ मे ११तारीख के दरभंगा कमिश्नरी पर धरना दिया जायेगा.

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