उन्नत भारत वेलफेयर सोसाइटी ने मनाया “इंटरनेशनल रोटी डे”

आजकल तो लोग अपनी सुख-सुविधाओं में इतने वयस्त हो गए हैं कि उन्हें ये भी पता नहीं चलता की देश में प्रत्येक दिन लाखों ऐसे लोग हैं जो बिन खाए  सो जाते हैं. आज के वैष्विक युग में जहां युवा अच्छी नौकरी, आरामदायक जिंदगी, मंहगी गाड़ी और बंगले पाने की ख्वाइशि को पूरा करने में लगे रहते हैं वहीं इस देश में कुछ ऐसे ही नौजवान हैं जिन्हें अपनो से ज्यादा दूसरों की फिक्र रहती है…उन्हीं में से एक नाम है, उन्नत भारत सोशल वेलफेयर सोसाइटी के प्रसिडेंट अभिषेक मिश्रा.

बीते 2 अप्रैल को एक ओर वे लोग थे जिन्हें सिर्फ अपनी रोटी की फिक्र थी…वहीं दूसरी ओर अभिषेक, जिन्हें दूसरों की रोटी की फिक्र थी….सनद हो कि अभिषेक मिश्रा पिछले कई वर्षों से अपनी संस्था उन्नत भारत सोशल वेलफेयर सोसाइटी के बैनर तले प्रत्येक वर्ष 2 अप्रैल को ‘इंटरनेशनल रोटी डे’ के मनाती है जिसमें एक वक्त का खाना छोटे-छोटे गरीब बच्चे और उन गरीबों लोगों को खिलाया जाता है जिन्हें एक जून की रोटी भी ठीक से नसीब नहीं होता.

इसबार यमुना नदी तट पर बसे झुग्गियों और मध्य दिल्ली के आसपास  के इलाके में उन्नत भारत की ओर से गरीबों को खाना खिलाया गया जिसमें कई छात्र व युवाओं ने हाथ बंटाया.  वे सिर्फ खाना परोसे ही नहीं बल्कि उन गरीब छोटे-छोट बच्चों को वकायदा अपने हाथों से भी खिलाया. सभी बच्चे काफी खुश दिख रहे थे. इसमें सबसे खास बात यह है कि इस मुहिम में शामिल होने छात्र हों या नौजवान दोस्त, सभी अपने-अपने घर से खाना बनाकर लाते हैं और इस मुहिम में साथ देते हैं.

इस मुहिम को शुरु करने वाले अभिषेक मिश्रा का कहना है कि, हमारी छोटी सी इस मुहिम का मकसद आगे बढ़कर भूखे लोगों को एक वक्त भर पेट भोजन कराना है. अगर इस कार्यक्रम के तहत हर कोई एक दिन ऐसा करे और किसी एक को एक दिन खाना खिलाए तो इस देश का कोई भी लोग भूखा नहीं सोएगा.

उन्होंने यह भी कहा कि, जब हमने इस मुहिम की शुरुआत की थी तो मुश्किल से चार या पांच लोग साथ में थे आज कई लोग हमारे कंधे से कंधे मिलाकर इस मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं..हम आशा ही नही पूर्ण विश्वास है एक यह मुहिम देश में मिसाल कायम करेगी.

साथ ही उन्होंने इस कार्यक्रम में मुख्य भूमिका  मे रहे साथी रिमझिम, विक्रांत, कोमल एवं निरंजन के प्रति आभार व्यक्त किया और चलते-चलते एक शेर सुनाते गए.. “एक नई सोच की ओर कदम बढ़ाएं, हौसलों से अपने उचाईयों को छू कर दिखाएं जो आज तक रह गई थी सिमट कर ख्यालों में उन सपनो को सच कर के दिखाएं”.

 

 

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