सुशील मोदी के प्रभाव के कारण मुख्यमंत्री मैथिली को नहीं दे पा रहे हैं द्वितीय राजभाषा का दर्जा- कीर्ति आजाद

नई दिल्ली. झारखण्ड सरकार द्वारा मैथिली को द्वितीय राजभाषा की दर्जा दिए जाने के बाद भाजपा से निष्कासित दरभंगा के सांसद कीर्ति आज़ाद ने आरोप लगाया कि उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के प्रभाव के कारण मुख्यमंत्री मैथिली को द्वितीय राजभाषा दर्जा नहीं दे पा रहे हैं। जबकि झारखण्ड सरकार मैथिली को तीन दिनों पूर्व द्वितीय राजभाषा का दर्जा दे चुकी है. सांसद श्री आज़ाद ने कहा कि मिथिलावासियों की माँ है मैथिली। मैथिली सभी आवश्यक शर्तो को पूरा करती है और न इससे द्वितीय राजभाषा घोषित करने में कोई वित्तीय भार पड़ेगी। इसमें महज निर्णय लेने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, अब तक के बीते समय से यह स्पष्ट हो चुका है कि, सबका साथ सबका विकास मिथिला के लोगों के लिए नहीं है। एम्स स्थापना ,हवाई सेवा प्रारंभ करने ,स्मार्ट सिटी का चयन और युवाओं को रोजगार देने आदि मामलो से जगजाहिर है। सांसद ने उपमुख्यमंत्री पर आरोप लगाया कि मिथिला और मैथिली विरोधी अपनी दुर्भावना के कारण वे मिथिला के विकास में बाधक बन रहे हैं। इस कारण मैथिली को द्वितीय राजभाषा देने के कैबिनेट के निर्णय को लटका कर यहाँ के लोगों को न्याय से वंचित किया जा रहा है।

उन्होने कहा कि मिथिला के छुटभैये नेता लोगों को बरगलाने में लगे हैं। लोग सभी सच्चाईयों को बखूबी समझते है। सांसद श्री आज़ाद ने कहा कि उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी नीतीश सरकार का जनहित के मामले में निर्णय लेने में अड़चने पैदा कर रहे हैं जिस कारण इस बार लोगों को सरकार से निराशा उत्पन्न होने लगी है। बालू संकट अथवा हवाई सेवा के लिए, जमीन अघिग्रहण का मामला अब तक सुलझ नही पाया। सरकार की लोकप्रियता तेजी से गिर रही है।

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