गोवा,मणिपुर के बाद अब मेघालय से भी खाली हाथ लौटी कॉग्रेस, बीजेपी गठबंधन की बनेगी सरकार

मेघालय. शनिवार को पुर्वोत्तर के तीन राज्यों में हुए चुनाव के परिणाम अाने के बाद यह स्पष्ट हो गया था कि बीजेपी त्रिपुरा और नागलैंड में सरकार बनाने में सक्षम होगी, लेकिन मेघालय में जिस तरह से त्रिशंकु जनादेश मिले. उसके बाद से सबकी निगाहें इसी पर टीकी थी कि वहां किसकी सरकार बनेगी, क्योंकि चुनाव परिणाम आने के बाद मेघालय में सबसे बड़ी पार्टी के रुप में कॉग्रेस उभर कर सामने आई थी, लेकिन शुरु से ही बीजेपी आलाकमान की ओर से कही जाती रही की हम मेघायल में भी गठबंधन की सरकार बनाने में कामयाब होंगे और अंतत: हुआ भी यही. बड़ी संख्याबल वाली कॉग्रेस पार्टी एकबार फिर सरकार बनाने से चुक गई. हालांकि इसबार कॉग्रेस ने थोड़ी फुर्ती दिखाई थी लेकिन वो सरकार बनाने में कामयाब नहीं हो सकी.

रविवार को बीजेपी ने अपनी 2 सीटों के साथ 19 सीटें जितने वाली पार्टी नेशनल पीपल पार्टी, 6 हांसिल करने वाली यूनाइटेट डेमोक्रेटिक पार्टी, 4 सीटें पाने वाली पीडीएफ, 2 सीटें जीतने वाली एचएसपीडीपी और 1 निर्दलीय विधायक का समर्थन हांसिल कर सरकार बनाने की जादुई आंकड़े को पार कर गई.  कुल 34 विधायकों के समर्थन प्राप्त करने के बाद सभी घटक दल के सदस्य एनपीपी के नेता कोनराड संगमा के नेतृत्व में रविवार शाम को राज्यपाल के पास पहुंचे, जहां उन्होंने सभी पार्टियों के विधायकों की समर्थन वाली चिठ्ठी सौंपी. जिसके बाद राज्यपाल ने कॉग्रेस के दावे को खारिज करते हुए बीजेपी समर्थित पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया .

वहीं सरकार में यूडीपी से डिप्टी सीएम बनाने की मांग को लेकर चल रही अटकलें को खारिज करते हुए बीजेपी नेता हेमंत बिस्वा शर्मा ने कहा कि कोनराड संगमा ही राज्य के मुख्यमंत्री होंगे. और आप लोगों को स्पष्ट कर दूं कि मेघालय में कोई उप मुख्यमंत्री नहीं होंगे. सभा सहयोगियों को कैबिनेट मे जगह मिलेगी.

बीजेपी शीर्ष नेतृत्व की ओर से मेघालय भेजे गए नेता किरण रिजिजू, केजे अल्फोंस और हेमंत विश्वा शर्मा की तिकड़ी के रणनीतियों के ्आगे कॉग्रेस की एक न चली और उन्हें एकबार फिर खाली हाथ हीं लौटना पड़ा.

 

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