पीएनबी घोटाला : जेपीसी जांच पर तृणमूल असंतुष्ट

नई दिल्ली| तृणमूल कांग्रेस ने बुधवार को 11,300 करोड़ रुपये के पीएनबी धोखाधड़ी मामले की जांच संयुक्त संसदीय समिति(जेपीसी) से कराए जाने के विचार को खारिज कर दिया। वहीं कांग्रेस और मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी(माकपा) ने इस मामले में जेपीसी जांच का प्रस्ताव रखा है। तृणमूल नेता डेरेक ओ ब्रायन ने यहां कहा, “पीएनबी धोखाधड़ी मामले की गहन जांच होनी चाहिए। यह भ्रष्टाचार का बड़ा मामला है। लेकिन, हमें लगता है कि जेपीसी इसका उपाय नहीं है।”
उन्होंने कहा, “इसके पीछे कारण यह है कि स्वतंत्रता के बाद आठ मामलों में जेपीसी का गठन किया गया। ये मामले बोफोर्स(1987), हर्षद मेहता कांड(1992), केतन पारेख शेयर बाजार घोटाला(2001), सॉफ्ट ड्रिंक कीटनाशक मामला(2003), टूजी स्पैक्ट्रम मामला(2010), वीवीआईपी चॉपर घोटाला(2013), भूमि अधिग्रहण मामला(2015), एफआरडीआई अधिनियम(2017) हैं।”
उन्होंने कहा, “क्या इन सभी मामलों में जेपीएस ने कोई ठोस नतीजे निकाले? कुछ रपटों का अभी भी इंतजार है। कुछ पूरी तरह से लागू नहीं किए गए और कुछ में कार्रवाई की जानी बाकी है। इसलिए हम पीएनबी में जेपीसी जांच के खिलाफ हैं।”
इसबीच माकपा ने बुधवार को इस मामले में जेपीसी जांच की मांग की।
माकपा ने कहा, “इस मामले की गहन जांच की जरूरत है। इससे पहले के हर्षद मेहता या केतन पारिख वित्तीय धोखाधड़ी मामले में जेपीसी का गठन किया गया था और तब के वित्तमंत्री जेपीसी के समक्ष पेश हुए थे और उन्होंने बताया था कि इसके लिए क्या सुधारात्मक उपाय किए जाएं।”माकपा ने कहा, “इस मामले में भी जेपीसी का गठन होना चाहिए और मौजूदा वित्तमंत्री को इससे संबंधित सभी प्रश्नों का उत्तर देना चाहिए।”कांग्रेस ने इससे पहले 17 फरवरी को कहा था कि संसद में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया जाएगा और पार्टी मामले की जेपीसी जांच को लेकर कई विपक्षी पार्टियों से बात करेगी।कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिह सुरजेवाला ने कहा था, “लोगों के हित में कांग्रेस, संसद में समान सोच वाली पार्टियों से बात करेगी। हम उन्हें घोटाले के दस्तावेजी सबूत दिखाएंगे और साथ मिलकर संयुक्त रणनीति बनाएंगे।”

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