विश्व पुस्तक मेला में पहली बार सजा ‘मैथिली का मचान’

दिल्ली, शिवेश।
प्रगति मैदान के नाम से विख्यात दिल्ली का ह्रदय स्थल वैसे तो हमेशा अपने गौरवशाली इतिहास के कारण चर्चा में रहता है, परन्तु आज-कल यहाँ की हवाओं में ज्ञानवर्धक ऊर्जा प्रवाहित हो रही है। इसमें सरावोर होने के लिए देश के विभिन्न कोने से लोगों का हुजूम उमड़ रहा है। 6 जनवरी से शुरू इस ‘विश्व पुस्तक मेला’ का यह आयोजन भी बहुत खास है, क्योंकि नई दिल्ली ‘विश्व पुस्तक मेला’ का 26 वां वर्षगांठ मना रहा है। पहली बार 1972 में राष्ट्रपति वी.वी. गिरी द्वारा शुरू किया गया मेला आज इतना समृद्ध हो गया है कि यहाँ देश विदेश की अनेक प्रकाशक अपना स्टॉल लगाकर पाठकों को विभिन्न तरह की किताबें उपलब्ध करा रहें है।

आज वर्षों बाद प्रगति मैदान के इस ऐतिहासिक मेले में मैथिली का अपना स्वतंत्र स्टॉल का होना इस बात का प्रमाण है कि भाषा विकास के लिए भी लोगों में चेतना का संचार हुआ है। जहाँ एक ओर मैथिली किताब के प्रकाशन के लिए प्रकाशक आगे आ रहे हैं, वहीँ भाषा विकास को यज्ञ मानकर इसमें आहुती देने वालों की भी संख्या बढ़ी है। ‘मैथिली मचान’ के नाम से प्रगति मैदान के 12 नंबर हॉल में लगे इस स्टॉल पर लोगों की भीड़ भी आयोजकों को उत्साहित करने के लिए पर्याप्त है।
मैथिली मचान के आयोजन में सविता झा ‘खान’ तथा अमित आनंद का उत्साह मैथिली भाषा साहित्य को एक व्यवसाय का रूप देने की दिशा में ठोस कदम साबित हो रहा है, जिसके स्वागत में मैथिली साहित्यकारों के साथ-साथ प्रकाशक भी तत्पर हैं।

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