प्रत्येक वर्ष सरकारी शिक्षकों के मानदेय में बढ़ोतरी, लेकिन बच्चों के लिए बोरा-चट्टी

सोमू कर्ण।
पटना,27 दिसम्बर।

बिहार सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में कई ऐसे प्रयास किये जिससे बिहार की शिक्षा की स्थिति दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है जो कि बिहार के लिए खुशी की बात है। बिहार सरकार ने पहली कक्षा से 10 कक्षाओं के छात्र एवं छात्राओं के लिए पोशाक की सुविधा दी, खाना की व्यवस्था की जिससे गरीब परिवार के बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ भोजन भी मिले। लेकिन बिहार सरकार की इस कड़ी पहल के बीच एक बड़ी व्यवस्था चूकती हुई नजर आ रही है, जो है प्राथमिक विद्यालय एवं मध्य विद्यालय में बच्चों को बैठने की व्यवस्था।


कैसे ठंड में गुजर रही है स्कूली शिक्षा…

कड़ाके की ठंड में बिहार के 70 प्रतिशत प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों में बच्चो को बैठने के लिए बेंच एवं डेस्क की व्यवस्था नहीं है। जिसके कारण स्कूली बच्चे अपने घरों से बैठने के लिए बोरा या चट्टी लातें है। स्कूलों के प्रधानाध्यापक से पूछा गया कि स्कूल ने बैठने के लिए दरी भी नही है तो जवाब मिला कि सरकार द्वारा अभी तक मुहैया नही कराया गया है जिसके कारण स्कूल में दरी नही दिया जाता है। इस कड़ाके के ठंड में 5 साल से लेकर 12 साल तक के बच्चे सर्द जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते है।

शिक्षकों के वेतन बढ़ोतरी लेकिन बच्चे जमीन पर…
सरकारी शिक्षकों की वेतन की बात करें तो प्रत्येक वर्ष कुछ न कुछ बढ़ोतरी हो रही है लेकिन पिछले कई वर्षों से बिहार के अधिकतर स्कूल में बेंच की व्यवस्था नही की गई है जिसके कारण 50 प्रतिशत से ज्यादा बच्चे सरकारी विद्यालयों के बजाय प्राइवेट विद्यालय में नामांकन करवा रहें है।

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