मैथली संगीत मे दरभंगा की बबली चौधरी बहुत तेजी से बढ रही है आगे

प्रणव चौधरी।
दरभंगा,20 दिसम्बर।

बबली चौधरी मैथली गायिकी के रूप में अब सभी दर्शकों के दिलों पर राज कर रहीं है। समय रहते ही बबली चौधरी मैथिली गायन के क्षेत्र में बहुत आगे बढ़ चुकी है। जिससे दरभंगा सहित पूरे मिथिलांचल की मान बढ़ा रही है। आपको बता दें कि बबली चौधरी मूल रूप से दरभंगा के राघोपुर की हैं। बबली चौधरी स्वर्गीय इन्द्रनारायण झा की पुत्री हैं।

बबली चौधरी को गीत-संगीत की प्रेरणा अपने माँ से मिली, तभी से बबली इस क्षेत्र में पूरे दिल से संगीत की दुनिया मे ढल गयी। सबसे बड़ी बात तो ये है कि बबली अपने छोटी सी उम्र यानी महज 8 वर्ष में ही गीत-संगीत में अभिरुचि लेनी शुरू कर दी। बबली चौधरी फिलहाल क्लासिकल संगीत सिख रहीं है इसमे उनके पति विजय चौधरी खूब प्रोत्साहित कर रहें है। अपने पति द्वारा प्रोत्साहन मिलने से उन्हें अपने मुकाम को पाने में मदद मिल रही है, और गीत संगीत की दुनिया मे अपने बहुत आगे बढ़ रहीं है।

आगे आपको बताते चलूं की बबली को प्रथम बार मंच पर गाने का सौभाग्य रांची के हरमू मैदान में विद्यपति महोत्सव में मिला। उन्होंने उस मंच द्वारा “औंगुरी म’ डसल नागिनिया हो रमा चैत शुभ दिनमा” गीत से सभी श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। बबली ने अपने पहले “शिव के नचारी” से शुरुआत की जो दर्शकों को काफी आनंदित किया। ऐसे कई एलबम इनका हिट रहा लेकिन एक गीत “ऐना मुरली बजा ने कन्हैया” यूट्यूब पर खूब लोकप्रिय हुआ। बबली चौधरी लोकगायिका सारदा सिन्हा को और क्लासिकल में रंजना झा को अपना आदर्श मानती है। बबली की लोकप्रियता दिन-प्रितिदिन बढ़ती जा रही है। देश-विदेश सभी जगहों के श्रोता इनके गाये हुए गीतों को यूट्यूब के माध्यम से सुनकर आनंदित हो रहें है, जिसके कारण बड़े-बड़े कलाकार बबली चौधरी की प्रसंसा किये बगैर नही रहतें है, और उन हस्तियों के बीच अपनी एक अलग पहचान बना ली है। बबली अपने पति के साथ बिहार के राजधानी पटना में रह रहीं है, इनके पति पेशे से सीआईएसएफ में सब इंस्पेक्टर के पद पर हैं।

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