भाजपा विरोधी पार्टी का नारा ”भाजपा भगाओ देश बचाओ” सफल या असफल…

सोमू कर्ण।
पटना,19 दिसम्बर।

गुजरात चुनाव का मुद्दा बिहार के राजनीतिक माहौल के लिए काफी अहम था, क्योंकि बिहार की सबसे बड़ी पार्टी राजद जो कि कांग्रेस के साथ गठबंधन में है। और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव लगातार भाजपा को बिहार से ही नही बल्कि पूरे देश से खत्म करने पर तुले हुए है। लेकिन लालू प्रसाद यादव का यह मंसूबा कहीं भी पूरा होते हुए नजर नही आ रही है। लालू प्रसाद यादव हर उस पार्टी को एक होने के लिए आमंत्रित कर रहे है जो भाजपा के विपक्ष में चुनाव लड़ती हो।इससे पहले राजद सहित कई अन्य पार्टियों ने भाजपा के विरोध में भाजपा भगाओ देश बचाओ का नारा लगाया था,
जो अब बिल्कुल असफल नजर आ रही है।

गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा से आमने-सामने की टक्कर में कांग्रेस की करीबी हार से बिहार भी अछूता नहीं है। नतीजे ने प्रदेश भाजपा को उत्साहित और कांग्रेस को निराश किया है। सबसे बड़ा झटका तो राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को लगा है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार बढ़ते कद व भाजपा से मुकाबले के लिए समान विचारधारा वाली पार्टियों को एकजुट करने की कोशिशों में जुटे लालू प्रसाद को अब अपने मकसद को अंजाम तक पहुंचाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। लालू को गुजरात में कांग्रेस की हार की उम्मीद नहीं थी। यही कारण है कि वोटों की गिनती से एक दिन पहले तक लालू एग्जिट पोल के परिणामों को खारिज करते रहे थे। बिहार विधानसभा चुनाव का हवाला देते हुए वे दावा करते थे कि एग्जिट पोल का हिसाब सही नहीं होता। मतदाताओं के मिजाज और वक्त की नजाकत को देखते हुए गुजरात में चुनाव प्रचार के लिए लालू को कांग्रेस की तरफ से आमंत्रण नहीं दिया गया था। फिर भी लालू ने पटना से ही गुजरात के यदुवंशियों से भाजपा के खिलाफ वोट डालने की अपील की थी।
उन्होंने यह भी कहा था कि कांग्रेस की तरफ से बुलावा आएगा तो वे प्रचार के लिए गुजरात जा सकते हैं। हालांकि उन्हें बुलावा नहीं आया और उनकी खुलेआम अपील के बावजूद कांग्रेस को शिकस्त का सामना करना पड़ा। अब दोनों दलों पर असर पडऩा लाजिमी है। असंभव जीत से भाजपा भी सबक लेगी।

कांग्रेस की बढ़ेगी परजीविता

पिछले 27 वर्षों से बिहार में अपना दमखम खो चुकी कांग्रेस की दूसरे दलों पर निर्भरता और बढ़ जाएगी। चुनाव परिणाम के पहले तक माना जा रहा था कि गुजरात में राहुल गांधी की मेहनत काम आ सकती है। बेहतर नतीजे की बदौलत बिहार में कांग्रेस अपनी धारा तय कर सकती है। अगले चुनावों में लालू को अधिक सीटें छोडऩे के लिए बाध्य कर सकती है। साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी एवं केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा सरीखे अस्थिर चित वाले नेताओं को हिलाया-डुलाया जा सकता है। नतीजे ने यह सत्यापित कर दिया है कि कांग्रेस बिहार में परजीवी ही बनी रहेगी।

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