51% इंजीनियरिंग ग्रेजुएटस अँग्रेज़ी नहीं बोल पाने के कारण रोजगार से वंचित…। ख़बर हिन्दुस्तान

ख़बर हिन्दुस्तान/न्यूज़ डेस्क

नई दिल्ली: विश्व में भारत ही एक ऐसा बहुभाषीय देश है, जहाँ पर आज भी 1652 भाषाएं बोली जाती हैं। फलतः कोई भी स्थानीय भाषा देश की सम्पर्क भाषा नहीं बन पायी।

उत्तर-दक्षिण की भाषाई लड़ाई में अंग्रेजी को भरपूर फायदा मिला और आज भारत नहीं, बल्कि पूरे विश्व में अंग्रेजी लिंग्वा फ्रेंका अर्थात लोक भाषा के रुप में जानी जाती है।

2015 में देश के उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर की गई, यह अनुरोध करते हुए कि न्यायालय के हरेक फैसले और आदेश को हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराया जाए।
कोर्ट ने इस आवेदन को ठुकराते हुए कहा कि, कोर्ट लैंग्वेज इज इंग्लिश अर्थात न्यायालय की भाषा अंग्रेजी है। इसका स्पष्ट अर्थ निकलता है कि न्याय पाने के लिए अपनी बात को अंग्रेजी में रखना अनिवार्य है एवं माननीय न्यायाधीश भी अंग्रेजी में ही अपने आदेश एवं फैसले सुनाएंगे।
भारत में 1963 में आॅफिसियल लैंग्वे़ज एक्ट पास किया गया और यह घोषणा की गई कि अंग्रेजी भारत में अनन्त काल तक आॅफिसियल कम्युनिकेशन के रुप में प्रयोग होता रहेगा, साथ ही त्रि भाषा पद्धति के अंतर्गत हर शिक्षित व्यक्ति को कम से कम 3 भाषा की जानकारी होनी चाहिए, जिसमें अंग्रेजी अनिवार्य है।
आप चौक जाएंगे कि आज देश में अंग्रेजी जानने वालों की प्रतिशतता मात्र 10% है। इतना ही नहीं धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलने वालों की संख्या बहुत कम है। जबकि विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं में अंग्रेजी में उर्तीण होना अनिवार्य है। निजी कंपनी में जॉब प्राप्त करना हो या व्यावसायिक सफलता की बात हो, अंग्रेजी का ज्ञान काफी महत्व रखता है।
एक सर्वेक्षण के माध्यम से यह पता चला है कि 51% इंजीनियरिंग ग्रेजुएटस धारा प्रवाह अंग्रेजी नहीं बोल पाने के कारण रोजगार से वंचित रह जाते हैं।
इन सभी तथ्यों से एक बात स्पष्ट है कि भारत में अंग्रेजी का बहुत बड़ा बाजार है। देश की प्रतिष्ठित संस्था ब्रिटिश लिंग्वा ने ब्लाक स्तर पर ट्रेनिंग सेंटर खोलने की सामाजिक जिम्मेदारी उठायी है, जिसका दूरगामी साकारात्मक परिणाम होगा।हजारों युवक-युवतियाँ इससे जुड़कर स्वावलंबी बन सकते हैं। लाखों छात्र-छात्राओं का भविष्य उज्ज्वल होगा। संस्था के प्रबंध निदेशक एवं जाने माने लेखक डा. बीरबल झा का कहना है कि, साकार हो सबका सपना, हर का व्यक्तित्व हो अपना।

डा. झा ने आगे कहा कि इस अंग्रेजी सीखो-सिखाओ आंदोलन में भाग लेकर सामाजिक न्याय व्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही रोजगार बाजार में आप अहम भूमिका निभा सकते हैं। ब्रिटिश लिंग्वा का स्लोगन है, इंग्लिश फाॅर आल, ओपोर्चुनिटीज़ फाॅर आल।

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